बेगज जमाने से उम्मीद क्या करे खुद को कोस कर अल्ला से दुवा क्या करे फितरत नही थी किसी को जख्म देने की वो खुद ज़िन्दगी में आये हमारे तो हम लिहाज़ क्या करे
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