Tuesday, February 28, 2023

बेरहम

सो दर्द छुपा के भी मुस्कुराना पड़ता है,
जमाना कुछ भी कहे मुह उठाके ज़िंदा दिली के साथ जीना पड़ता है,
लोग कसमे वादे तो बहोत करते है रिश्ता बनाते वक्त,
रिश्ता बन जाते ही सब कुछ बड़ी आसानी के साथ भूल जाते है लोग।

ना कबूल

किसीको चाहना ओर उसी को पाना इतना मुश्किल क्यों है,
सो दर्द हो दिल मे फिर भी लोगो को दिखाने के लिए मुस्कुराना जरूरी क्यों है,
इश्क़ तो रूहानी है अपने आप हो जाता है,
जब कबूल ना हो मोहोब्बत उनसे तो उन्हें भुलाना  इतना मुश्किल क्यों है।

क्यों



हमने तो कर दिया था वादा उनसे आखिर तक साथ निभाएंगे पर न जाने क्यों उनके इरादे डगमगा गए बढ़ी खूबसूरती से दिया उन्होंने धोका हमे एक पल के लिए भी ना कतरा गए।


दर्द

मुकदर में था ही नही उसे पाना तो क्यों मिलाता है खुदा 
दर् दर् की ठोकरो के बाद भी क्यों प्यार जताता है उसे,
माना खामियां मुझ में ही है कि में उसके लाकय नही,
तो फिर क्यों ईश्क़ का ख्वाब दिखाके उसे मिलवाता है खुदा।