मुकदर में था ही नही उसे पाना तो क्यों मिलाता है खुदा दर् दर् की ठोकरो के बाद भी क्यों प्यार जताता है उसे, माना खामियां मुझ में ही है कि में उसके लाकय नही, तो फिर क्यों ईश्क़ का ख्वाब दिखाके उसे मिलवाता है खुदा।
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