Thursday, November 28, 2024

कशीही असलीस तरी माझीच तु

मनात माझ्या मनात तु, 
कशीही असलीस तरी माझीच तु.
हृदयात खुलते नाजूक कळी जेव्हा लाजून बघतेस तु,
कशीही असलीस तरी माझीच तू.
मी असा मी तसा रंगात तुझ्या रंगून वेगळा,
मी भुंगा आणि तु फुलपाखरू 
कशीही असलीस तरी माझीच तु.
मी स्वप्न वेडा  तुझ्या स्वप्नातला राजकुमारा वर भूललीस तु 
कशीही असलीस तरी माझीच तु.

कशीही असलीस तरी माझीच तु

Saturday, November 16, 2024

वक्त की बात

एक वक्त था जब उनके लिए हम खास थे,लोगो से दूर और हमारे दिले के वो पास थे,वक्त वक्त की बात है वक्त बदला वो बदले,
वो भूले हमे पर हम कैसे उन्हें भूल सकते है,इश्क की दास्तां जिसकी  उन्होंने की थी शुरुआत हम उनसे अंजान कैसे हो सकते है,अब तो ये आलम है कि छोड़ चुके है वो हमे ओर बस चुके है किसी ओर के दिल में ओर हम आज भी बैठे उनके इंतजार में उन्हीं के नग़्म्हे दोहरा रहे है