Thursday, September 26, 2024

दुःख

दुःखात दुःख मिसळता प्राण कंठाशी आले.
दुःखाला सामोरे जाता अश्रूंचे पाझर फुटले.
दुःखात बुडालो असता जगताचे दुःख पाहियले,जगताचे दुःख पाहता स्वतःचे दुःख मी विसरले.


तुझेच रूप

मन मंदिरात रूप तुझे सलोखे. 
चित्त न राहिले मजला माझे मी पण हरले.
तुझ्या रूपाचे चांदेन पाहता, 
मन माझे गुंतले तुझ्यात,
छंद न मला कसला नाही कोणता नाद,
तुझ्या डोळ्यात मी रमता विसरलो मी मलाच.
हरपलो मी चित्त ना राहिला कोणता ध्यास,
गंध तुझा स्मरणात झालो बावरा या जगात.

खुद से मोहोब्बत

किसी ओर से नहीं खुद से प्यार करणा सिखो,किसी ओर के लिये बाद मे पेहले खुद के लिये मुस्कुराणा सीखो,लोगो का  क्या है वो आते जाते रहेंगे आपके जिंदगी मे खुद के फायदे के लिये,पर तुम किसी ओर पे मरणे से पहले खुद के लिये जिना सिखों ।

दुनियादारी

लोगो को अब आदत हो गयी है नये लोग मिलतेहि पुराने दोस्तों को भूल जाने की,
या कहे सकते है काम निकलते ही आगे बढ़ जाने की,
जिन्हे हम समझते थे जान हमारी वही अब दिखा रहे है ओकात हमारी,
ऐसे दोस्तों को दिल से सलाम जिनके लिए हमने छोड़े सारे काम,
 उन्होंने दिया है जख्म अब ऐसा ना भूल पाएंगे इस अदाकारी को तुम्हारे,
नफरत का रिश्ता जो आपने शुरु किया है वो अब हम भी निभाएंगे, 
भूल के सारे वादे दुश्मही का रिश्ता हम भी अच्छे से निभाएंगे

दिल के रिश्ते

क़ोई कितना भी कहे क़ोई अपना नहीं होता,
दुनिया से परे क़ोई रिश्ता नहीं होता,
मानते है हम और जान ते हो आप भी,
दिल से जुडा हुवा रिश्ता कभी पराया नहीं होता.

तुझ्यातला मी

सुखात नाही पण दुःखात तरी साथ माझी राहू दे,
स्मित हास्य नको ओठांवरती परी हुदक्यात नाव राहू दे,
मी असा मी तसा मी कसा ही राहू दे,
चीब डोळे होताच मात्र याद माझी राहू दे.

उन्हे देखं

वक़्त रेहते संभाल  तो लिया था उसने खुद को, और उची उड़ान भी भर चुके थे फिर भी ना जाने क्यों दर्द मे है आज,क्या हवाओ ने साथ ना दिया या हवाओ का रुक इतना तेज़ था की कश्ती के टुकड़े हज़ार हुवे।