KARUNYA
Thursday, September 26, 2024
उन्हे देखं
वक़्त रेहते संभाल तो लिया था उसने खुद को, और उची उड़ान भी भर चुके थे फिर भी ना जाने क्यों दर्द मे है आज,क्या हवाओ ने साथ ना दिया या हवाओ का रुक इतना तेज़ था की कश्ती के टुकड़े हज़ार हुवे।
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