ये इश्क़ है साहब ये किया नहीं जाता हो जाता है।अगर ये हो गया तो फिर ना होश रहता है ना मंज़िल का पता।बस इसके बहाव में आप बहते जाते हो। खुशनसीबो को मिलती है मंज़िल और नहीं मिली तो टूट कर बिखर जाते है।
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