शुक्र गुजार हु ऊन दोस्तों का जिंनोने मुझे लिखने की आझादी दी.दर्द खुशी गम सब कुछ बया करनेकी एक नही जगह दी. युह तो घुट घुत कर जी रहा था अपने आप मे.कलम पकडा कर उन्होंने जिने की नयी वजह दी.
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