जो लिखा था वो कभी हुआ नहीं और जो हुआ वो लिखने की कभी हिम्मत हुई नहीं, अक्सर ज़िन्दगी में ऐसा ही होता है जो होना चाहिए वो होता नहीं और जो होता है वो हम बया कर नहीं पाते, मिट्टी में दफ़्न मुर्दे से पूछो कफन में दफन कितने राज़ है।
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