दिल में इतना ज़हर है कि अब सहा नहीं जाता लफ़्ज़ों में लिख - लिख वो बया हो नहीं पाता मिलते है कुछ लोग सुकून के लिए, पर लफ़्ज़ों के ज़ायकों पे कोई संग रह नहीं पाता।
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