Monday, February 22, 2021

ज़िन्दगी

वक़्त के चलते रेत भी फिसलने लगी, हम ठहरे रहे ज़िन्दगी आगे बढ़ने लगी,तड़फते रहे हम सुकून की तलाश में हर पल चाहत तो ना मिली और ज़िन्दगी तभा होती गयी।

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