इश्क़
कभी कभी बिना कहे चाहत इतनी बढ़ जाती है कि बिन कहे रहा नही जाता,उसे देख देख मन भरता नही उसे मिले बिना जिया नही जाता,ये इश्क़ इस कदर रुहानी हो जाता हैं कि क्या बताये,साँसों से लेके दिल तक सर चढ कर चिल्ला चिल्ला के केहता है,ओर उनके बीना ज़िंदगी का गुजारा भी नही होता.
No comments:
Post a Comment