Sunday, January 31, 2021

दो लफ्ज़

दो लफ्ज़ उनके लिए 

वो इस कदर हमारी बाहों में सिमट गए  कुछ ना याद रहा हमे सब कुछ हम भूल गए 
दो पल के लिए रुक सी गयी ज़िन्दगी सारी हम उन्ही के थे और उन्ही के हो के रेह गए।

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