जिंदगी थी वो हमारी फिर भी छोड़ कर चले गए,दासता कुछ ऐसी लिखी रब ने सब कुछ तोड़ कर चले गए,जब नींद में थे तो सपना बहुत सुहाना था, आंख जैसे खुली सारे सपने चूर-चूर हो गए।
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