Thursday, September 8, 2022

डर




वक़्त बे वक़्त उसे याद कर आँखे नम हो जाती है बेहत चाहता हु उसे पर इज़हार नही कर सकता इज़हार कर उन्हे खोना में बर्दाश नही कर सकता।

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