Wednesday, July 28, 2021

माहोब्बत

वो माहोब्बत ही क्या जो शक्ल से कि जाए,वो प्यार ही क्या जो जिस्म तक सीमित हो जाये,इश्क़ तो रुहमानी है जनाब,जो दिल से निकल कर रूह तक साथ चले,बिना लफ्जो के हर अल्फ़ाज़ समज जाए.

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